CTET Paper II (Upper Primary: Class 6-8)

हिंदी व्याकरण - वाक्य विश्लेषण अलंकार छंद रस (Rhetoric and Poetics) question bank (Language II (Hindi))

Practice 111 free CTET Paper II (Upper Primary: Class 6-8) Language II (Hindi) - हिंदी व्याकरण - वाक्य विश्लेषण अलंकार छंद रस (Rhetoric and Poetics) questions with answers and step-by-step solutions.

Q1.
भारत 15 अगस्त, 1947 को आज़ाद हुआ। इस आज़ादी के लिए पूरे देश की जनता ने एक लंबा और मुश्किल संघर्ष चलाया था। इस संघर्ष में समाज के बहुत सारे तबकों की हिस्सेदारी थी। तरह-तरह की पृष्ठभूमि के लोगों ने इसमें भाग लिया। वे स्वतंत्रता, समानता तथा निर्णय प्रक्रिया में हिस्सेदारी के विचारों से प्रेरित थे। औपनिवेशिक शासन के तहत लोग ब्रिटिश सरकार से भयभीत रहते थे। वे सरकार के बहुत सारे फ़ैसलों से असहमत थे। लेकिन अगर वे इन फ़ैसलों की आलोचना करते तो उन्हें भारी खतरों का सामना करना पड़ता था। स्वतंत्रता आंदोलन ने यह स्थिति बदल डाली। राष्ट्रवादी खुलेआम ब्रिटिश सरकार की आलोचना करने लगे और अपनी माँगें पेश करने लगे। 1885 में ही भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने माँग की कि विधायिका में निर्वाचित सदस्य होने चाहिए और उन्हें बजट पर चर्चा करने एवं प्रश्न पूछने का अधिकार मिलना चाहिए। 1909 में बने गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया ऐक्ट ने कुछ हद तक निर्वाचित प्रतिनिधित्व की व्यवस्था को मंजूरी दे दी। हालाँकि ब्रिटिश सरकार के अंतर्गत बनाई गई ये शुरुआती विधायिकाएँ राष्ट्रवादियों के बढ़ते जा रहे दबाव के कारण ही बनी थीं, लेकिन इनमें भी सभी वयस्कों को न तो वोट डालने का अधिकार दिया गया था और न ही आम लोग निर्णय प्रक्रिया में हिस्सा ले सकते थे।

'दबाव' शब्द का प्रयोग कहाँ पर होगा?

CTET Paper II - Dec 2018, Q98 (Official PYQ)

(A)
चढ़ता ______ गिरता गया।
(B)
हवा का ______ कम हो गया।
(C)
भीड़भाड़ ______ से था।
(D)
सभी चुपचाप ______ से थे।
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Q2.
मेरा थोड़ा बहुत संबंध साहित्य की दुनिया से भी है। यही हालात मैं यहाँ भी देखता हूँ। यूरोपीय साहित्य का फैशन हमारे उपन्यासकारों, कहानी-लेखकों और कवियों पर झट हावी हो जाता है। मैं अपने प्रांत पंजाब की बात करता हूँ। मेरे पंजाब में युवा कवियों की नयी पौध सामाजिक व्यवस्था के खिलाफ़ इंकलाबी जज़्बे से ओत-प्रोत है। इसमें भ्रष्टाचार, अन्याय, शोषण को हटाने और एक नयी व्यवस्था बनाने की बात की गई है। हाँ, हमें सामाजिक बदलाव की ज़रूरत है और इन कविताओं में बातें तो बहुत अच्छे ढंग से कही गयी हैं पर इनका स्वरूप देसी नहीं है। इस पर पश्चिम का प्रभाव है। परिणाम यह है कि यह सारा इंकलाब एक छोटे-से कागज़ पर सीमित रह जाता है। बस, साहित्यिक समझ रखने वाले एक छोटे-से समूह में इनकी बात होती है। किसान, मज़दूर, जो शोषण को झेल रहे हैं, जिन्हें वे इंकलाब की प्रेरणा देना चाहते हैं, वे इसे समझ ही नहीं पाते हैं। इस साल मेरी मातृभूमि पंजाब में मुझे गुरुनानक विश्वविद्यालय के सीनेट का सदस्य बनाने के लिए नामित किया गया। जब मुझे उसकी पहली मीटिंग में शामिल होने के लिए बुलाया गया, तो मैं पंजाब में ही प्रीतनगर के पास था। एक दिन शाम को अपने ग्रामीण दोस्तों से गपशप करते हुए मैंने अमृतसर में होने वाली सीनेट की मीटिंग में जाने का ज़िक्र किया तो किसी ने कहा, “हमारे साथ तो आप तहमद (लुंगी) और कुर्ते में हमारे जैसे ही बने फिरते हो, वहाँ सूट-बूट पहन कर साहब बहादुर बन जाओगे !” मैंने हँसते हुए कहा- "क्यों, आप अगर चाहते हैं तो मैं ऐसे ही चला जाऊँगा।" तभी कोई दूसरा बोला, "आप ऐसा कर ही नहीं सकते।"

'ग्रामीण, सामाजिक, युवा' आदि शब्द हैं-

CTET Paper II - Dec 2018, Q128 (Official PYQ)

(A)
संज्ञा
(B)
सर्वनाम
(C)
विशेषण
(D)
क्रिया
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